देश की कोचिंग राजधानी माने जाने वाले कोटा में इन दिनों राजनीतिक हलचल से ज्यादा चर्चा छात्रों के भविष्य की हो रही है। राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज है, लेकिन शहर के हजारों छात्र, अभिभावक और कोचिंग संस्थान इस बहस से दूरी बनाए रखना चाहते हैं।
21 जून को होने वाले NEET री-टेस्ट को लेकर छात्रों पर पहले से ही अतिरिक्त दबाव है। ऐसे में कई अभिभावकों का मानना है कि किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि से परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों का ध्यान भटक सकता है। उनका कहना है कि इस समय सबसे बड़ी जरूरत एक शांत और सकारात्मक माहौल की है।
कोटा में पढ़ाई कर रहे कई छात्रों का कहना है कि वे परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का स्वागत करते हैं, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले होने वाली राजनीतिक गतिविधियां उनकी तैयारी को प्रभावित कर सकती हैं। उनका फोकस केवल अच्छे प्रदर्शन और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल करने पर है।
दूसरी ओर, कोचिंग संस्थानों ने भी छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने और परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है। संस्थानों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में छात्रों ने काफी तनाव और अनिश्चितता का सामना किया है, इसलिए अब उनका पूरा ध्यान परीक्षा की सफलता पर होना चाहिए।
राजनीतिक दल भले ही इस मुद्दे पर आमने-सामने हों, लेकिन कोटा का शैक्षणिक माहौल एक अलग संदेश दे रहा है। यहां के लोगों का मानना है कि छात्रों के हित किसी भी राजनीतिक एजेंडे से ऊपर होने चाहिए। शहर चाहता है कि परीक्षा संपन्न होने तक शिक्षा और छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी जाए।
NEET री-टेस्ट की तारीख नजदीक आते ही कोटा में एक ही आवाज सुनाई दे रही है—विद्यार्थियों को तैयारी का समय और मानसिक शांति मिले, ताकि वे बिना किसी व्यवधान के अपने सपनों की ओर कदम बढ़ा सकें।



