सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को देश की सुरक्षा स्थिति और भविष्य की सैन्य तैयारी को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना लगातार अपनी क्षमताओं को आधुनिक और मजबूत बना रही हैं तथा मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए हर संभावित चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनके अनुसार, सीमाओं पर हाल के समय में जो तनावपूर्ण स्थिति बनी थी, वह अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और इसे एक अस्थायी विराम के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसके लिए निरंतर सतर्कता आवश्यक है।
सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि भविष्य के युद्ध अब पहले जैसे नहीं रहेंगे, बल्कि वे तेज, तकनीक-आधारित और कई मोर्चों पर एक साथ लड़े जाने वाले होंगे। इसी कारण तीनों सेनाएं मिलकर एकीकृत रणनीति पर काम कर रही हैं, ताकि किसी भी परिस्थिति में तुरंत, सटीक और समन्वित जवाब दिया जा सके। उन्होंने जोर दिया कि त्रि-सेवा समन्वय अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आधुनिक रक्षा प्रणाली की रीढ़ बन चुका है, जिसे लगातार मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि आज का युद्धक्षेत्र केवल जमीन, समुद्र या आसमान तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह डेटा, नेटवर्क और रियल-टाइम इंटेलिजेंस की दुनिया तक फैल चुका है। ऐसे समय में निगरानी और सूचना की सटीकता ही सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। हर गतिविधि पर नजर रखना संभव होने के कारण सैन्य रणनीति को और अधिक तेज, सटीक और अनुकूल बनाना जरूरी हो गया है।
जनरल द्विवेदी ने सूचना युद्ध (Information Warfare) को भी आधुनिक संघर्ष का एक अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि आज किसी भी देश की ताकत केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सही सूचना, राष्ट्रीय एकता और जनविश्वास से भी तय होती है। गलत सूचना और भ्रम फैलाने की कोशिशें अब युद्ध का हिस्सा बन चुकी हैं, जिनसे निपटना उतना ही जरूरी है जितना सीमाओं की रक्षा करना।
अपने संदेश के अंत में सेना प्रमुख ने कहा कि जब देश एक साझा दृष्टिकोण, मजबूत विश्वास और एकजुट सोच के साथ आगे बढ़ता है, तो किसी भी चुनौती का सामना अधिक प्रभावी और आत्मविश्वास के साथ किया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत अपनी रक्षा संरचना को लगातार आधुनिक बना रहा है और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के अनुसार खुद को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।



