तमिलनाडु सरकार द्वारा सात वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को उच्च पद पर पदोन्नत किए जाने का मामला अब कानूनी और प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है। केंद्र सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट को बताया कि इन अधिकारियों को पदोन्नति देने से पहले आवश्यक केंद्रीय स्वीकृति नहीं ली गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश हुए कानून अधिकारियों ने अदालत को बताया कि अखिल भारतीय सेवाओं से जुड़े अधिकारियों की पदोन्नति के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है, तो इस संबंध में आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
विवाद उन सात आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर है जिन्हें राज्य सरकार ने उच्च प्रशासनिक ग्रेड में स्थान दिया था। याचिकाकर्ता पक्ष ने दावा किया कि यह निर्णय स्थापित सेवा नियमों और केंद्र-राज्य समन्वय की प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था।
केंद्र सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि इस मुद्दे की समीक्षा की जा रही है और संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया कि अदालत में लंबित जनहित याचिका का परिणाम चाहे जो हो, प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
मामले ने एक बार फिर उन प्रक्रियाओं को चर्चा में ला दिया है जो अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और सेवा शर्तों को नियंत्रित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का असर भविष्य में केंद्र और राज्यों के बीच प्रशासनिक समन्वय से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है।
अब सभी की नजर मद्रास हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर है, जहां इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।


