अरबपति से दिवालिया तक का सफर, अब कोर्ट के आदेश से बढ़ी रवींद्रन की परेशानी:

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अरबपति से दिवालिया तक का सफर, अब कोर्ट के आदेश से बढ़ी रवींद्रन की परेशानी बायजू के संस्थापक बायजू रवींद्रन को निवेश से जुड़े वित्तीय विवाद मामले में सिंगापुर की अदालत से बड़ा कानूनी झटका लगा है। कोर्ट ने उन्हें छह महीने की कारावास की सजा सुनाने के साथ भारी आर्थिक दंड भी लगाया है।

बायजू संकट गहराया: संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर कोर्ट से 6 महीने की जेल, कंपनी के पतन की कहानी और तेज हुई

भारत की प्रमुख एडटेक कंपनी बायजू एक बार फिर बड़े संकट में घिर गई है। कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की अदालत ने अवमानना मामले में दोषी मानते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह मामला कंपनी की संपत्तियों से जुड़े अदालती आदेशों का पालन न करने से संबंधित बताया जा रहा है।

एक समय 22 अरब डॉलर के मूल्यांकन तक पहुंच चुकी बायजू ने शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल क्रांति का नेतृत्व किया था। महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा की मांग बढ़ने पर कंपनी ने तेजी से विस्तार किया और दुनिया भर के निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। लेकिन इसी तेज विस्तार के साथ वित्तीय अनियमितताओं, बढ़ते कर्ज और पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठने लगे।

2021 में लिए गए बड़े विदेशी कर्ज के बाद कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर होने लगी। ऑडिट रिपोर्ट में देरी, बढ़ते घाटे और ऑडिटर्स के इस्तीफे ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके बाद विदेशी कर्जदाताओं ने आरोप लगाया कि सैकड़ों मिलियन डॉलर की रकम बिना उचित जानकारी के विभिन्न इकाइयों में ट्रांसफर की गई, जिससे कानूनी विवाद और गहरा गया।

यह विवाद सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर तक फैल गया। कई अदालतों में संपत्ति, निवेश और नियंत्रण को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है। सिंगापुर कोर्ट ने इसी मामले में बायजू रवींद्रन को आदेशों की अवहेलना का दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।

भारत में भी कंपनी की मुश्किलें बढ़ती गईं। कर्मचारियों को वेतन भुगतान में देरी, बड़े पैमाने पर छंटनी और निवेशकों की नाराजगी ने कंपनी की हालत और खराब कर दी। राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने भी कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया को मंजूरी दी है।

कभी भारतीय स्टार्टअप का चमकता सितारा रही बायजू अब गहरे वित्तीय संकट और कानूनी लड़ाइयों से जूझ रही है। कंपनी का मूल्यांकन अपने उच्चतम स्तर से गिरकर बेहद कम रह गया है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े स्टार्टअप पतन मामलों में से एक बन गई है।

हालांकि बायजू रवींद्रन ने सभी आरोपों से इनकार किया है और दावा किया है कि कंपनी में किसी तरह की गलत वित्तीय गतिविधि नहीं हुई। उनका कहना है कि कई मामलों में समझौते की बातचीत चल रही है और स्थिति को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बायजू का यह मामला भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा सबक है, जो तेज विकास के साथ मजबूत वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है।

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