नई दिल्ली: भारत सरकार इस वित्त वर्ष में विनिवेश (Disinvestment) और एसेट मॉनेटाइजेशन के जरिए ₹80,000 करोड़ के लक्ष्य से अधिक राशि जुटाने की उम्मीद कर रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, LIC की सफल हिस्सेदारी बिक्री, संभावित IDBI Bank विनिवेश और RBI से मिले रिकॉर्ड डिविडेंड से सरकारी खजाने को बड़ी मजबूती मिलेगी।
हाल ही में सरकार ने LIC में हिस्सेदारी बेचकर ₹31,550 करोड़ जुटाए हैं। इसके अलावा Coal India और Indian Railway Finance Corporation (IRFC) में हिस्सेदारी बिक्री से अब तक कुल 5.5 अरब डॉलर (करीब ₹46,000 करोड़) से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, IDBI Bank में सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री भी इसी वित्त वर्ष में पूरी होने की संभावना है। इससे सरकार को करीब ₹21,000 करोड़ की अतिरिक्त आय हो सकती है, जिससे विनिवेश लक्ष्य आसानी से पार किया जा सकता है।
हालांकि, सरकार पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे ईंधन सब्सिडी और उर्वरक आयात का खर्च बढ़ गया है। इसी वजह से कुछ विशेषज्ञों ने सरकार के 4.3% राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के लक्ष्य को लेकर चिंता जताई है।
सरकार को राहत RBI से मिले रिकॉर्ड डिविडेंड से भी मिली है। 1 अप्रैल से 5 अगस्त के बीच सरकार को ₹3.24 लाख करोड़ का डिविडेंड प्राप्त हुआ है, जो पूरे वित्त वर्ष के अनुमान से भी अधिक है। इसमें सबसे बड़ा योगदान RBI का रहा है।
सरकार अब बड़ी कंपनियों के निजीकरण की बजाय सूचीबद्ध सरकारी कंपनियों में छोटी हिस्सेदारी बेचने की रणनीति पर अधिक जोर दे रही है। माना जा रहा है कि इससे सरकारी आय बढ़ेगी और बाजार में निवेशकों की भागीदारी भी मजबूत होगी।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
- विनिवेश से सरकार की आय बढ़ेगी।
- PSU कंपनियों में नए निवेश के अवसर मिल सकते हैं।
- राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
- सरकारी वित्तीय स्थिति मजबूत होने से बाजार का भरोसा बढ़ सकता है।
निष्कर्ष: बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच LIC की सफल हिस्सेदारी बिक्री, संभावित IDBI Bank डील और RBI डिविडेंड सरकार के लिए बड़ी राहत साबित हो रहे हैं। इससे इस वित्त वर्ष में ₹80,000 करोड़ के विनिवेश लक्ष्य को पार करने की संभावना काफी मजबूत दिखाई दे रही है।



