नई दिल्ली: संसदीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) संबंधी स्थायी समिति ने मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन के भीतर माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है। समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के विषय में संबोधित करने वाला वीडियो हटाए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है।
लोकसभा सचिवालय ने सरकार को सूचित किया है कि यदि मार्क जुकरबर्ग निर्धारित समय के भीतर माफी नहीं मांगते हैं, तो मेटा के प्लेटफॉर्म को आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली सुरक्षा वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। साथ ही, उनके खिलाफ कार्रवाई की भी संभावना जताई गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मेटा के अधिकारी प्रधानमंत्री की पोस्ट हटाए जाने के मुद्दे पर शीर्ष सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। इस मामले को लेकर सरकार और कंपनी के बीच चर्चा जारी है।
इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोकसभा की निदेशक ए. ज्योतिर्मयी ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में 3 अगस्त को आयोजित संसदीय स्थायी समिति की बैठक का उल्लेख है, जिसमें गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा मेटा सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
पत्र के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को परीक्षा संबंधी विवादों तथा पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर संबोधित करने वाला वीडियो फेसबुक से लगभग 5–6 घंटे तक हटाया जाना समिति ने अत्यंत गंभीर माना। बैठक के दौरान समिति ने इस मुद्दे पर मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।



