नई दिल्ली: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर केंद्र सरकार ने इसके सार्वजनिक गायन और प्रस्तुति के संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब जिन अवसरों पर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ दोनों का गायन या वादन होना है, वहां वंदे मातरम् का गायन राष्ट्रीय गान से पहले किया जाएगा।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित लाल किले की प्राचीर से पहली बार वंदे मातरम् का गायन राष्ट्रीय गान से पहले किया जाएगा। यह वर्ष इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाए जाने की 150वीं वर्षगांठ का अवसर है।
अब सभी छह अंतरों के गायन पर जोर
अब तक राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक रूप से स्वीकृत संस्करण में मुख्य रूप से पहले दो अंतरों का ही इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों के गायन पर जोर दिया गया है।
केंद्र ने 11 फरवरी 2026 को सार्वजनिक समारोहों, स्कूलों और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों सहित अन्य अवसरों पर राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे।
राष्ट्रीय गीत में बाधा डालना अब अपराध
यह बदलाव Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026 के पारित होने के बाद सामने आया है। इस संशोधन के तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को जानबूझकर बाधित करना, रोकना या उसमें व्यवधान उत्पन्न करना आपराधिक अपराध माना गया है।
सरकार के नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के सम्मानजनक और निर्धारित तरीके से गायन को सुनिश्चित करना है। सार्वजनिक और आधिकारिक आयोजनों में अब इसके प्रस्तुतीकरण के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना आवश्यक होगा।
क्यों खास है वंदे मातरम्?
‘वंदे मातरम्’ की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रवादी भावना और देशभक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक बना। स्वतंत्र भारत में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत और ‘जन गण मन’ को राष्ट्रीय गान का दर्जा प्राप्त है।
नए नियमों के बाद राष्ट्रीय गीत के सार्वजनिक गायन और आधिकारिक समारोहों में इसकी प्रस्तुति को लेकर स्पष्टता बढ़ने की उम्मीद है।


